शनिवार, 2 अगस्त 2025

ज्ञानकोश ए ग्लोबल स्कूल में आयोजित अभिभावक-शिक्षक-विद्यार्थी मीटिंग, 511 अभिभावकों ने की सहभागिता

 

महेंद्रगढ़

आकोदा खुडाना स्थित ज्ञानकोश ए ग्लोबल स्कूल में अभिभावक-शिक्षक-विद्यार्थी मीटिंग (PTSM) का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें कुल 511 अभिभावकों ने भाग लेकर बच्चों की शिक्षा और विकास के प्रति अपनी गहरी रुचि दिखाई। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन को बेहतर बनाना और उनके सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षक व अभिभावकों के बीच समन्वय स्थापित करना रहा।


विद्यालय के सीईओ राकेश कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि इस प्रकार की मीटिंग्स विद्यार्थियों के आत्मविश्वास और मानसिक विकास में अहम भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि जब बच्चों को यह अनुभव होता है कि उनके शिक्षक और अभिभावक उनके प्रयासों पर नजर रखे हुए हैं, तो वे अपनी शिक्षा और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में और अधिक मनोयोग से भाग लेते हैं।

राकेश कुमार ने आगे कहा कि पीटीएसएम अभिभावकों को यह समझने में मदद करता है कि उनके बच्चे घर और स्कूल में किस प्रकार का व्यवहार करते हैं और किन परिस्थितियों में उन्हें किस प्रकार से प्रतिक्रिया देनी चाहिए। यह पहल बच्चों के भावनात्मक स्वास्थ्य में सुधार लाने में भी सहायक होती है।

विद्यालय के प्राचार्य रामनिवास यादव ने बताया कि यह बैठक केवल रिपोर्ट कार्ड देखने तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह एक सहयोगात्मक प्रयास होता है, जो बच्चे के सीखने के माहौल को और अधिक सकारात्मक बनाने का कार्य करता है। उन्होंने कहा कि इस मीटिंग से अभिभावक और शिक्षक दोनों एक साझा लक्ष्य की ओर अग्रसर होते हैं—बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में। इस अवसर पर विद्यालय का समस्त स्टाफ भी उपस्थित रहा और अभिभावकों से सकारात्मक संवाद किया।

पाली का संस्कार भारती स्कूल कबड्डी में अव्वल, तीनों आयु वर्गों में प्रथम स्थान

 

महेंद्रगढ़ 

महेंद्रगढ़ के गांव निंबी स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में चल रही दो दिवसीय ब्लॉक स्तरीय खेल प्रतियोगिता के दूसरे दिन पाली के संस्कार भारती स्कूल ने कबड्डी में शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी आयु वर्गों में प्रथम स्थान हासिल किया। अंडर-14, अंडर-17 और अंडर-19 आयु वर्ग की कबड्डी प्रतियोगिताओं में स्कूल की तीनों टीमों ने प्रथम स्थान प्राप्त कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है।


संस्कार भारती स्कूल, पाली के मैनेजिंग डायरेक्टर संदीप यादव ने बताया कि यह जीत स्कूल के खिलाड़ियों की मेहनत, कोचों की कुशल प्रशिक्षण प्रणाली और प्रबंधन के सहयोग का परिणाम है। उन्होंने कहा कि बच्चों ने मैदान में अनुशासन और रणनीति का शानदार उदाहरण प्रस्तुत किया, जिससे स्कूल में हर्ष का माहौल है।

स्कूल के अध्यक्ष सुदेश यादव ने बताया कि संस्कार भारती स्कूल खेलों विशेष रूप से कबड्डी में निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन करता आ रहा है और यह उपलब्धि उसकी सशक्त खेल नीति का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि निंबी स्कूल में मिली जीत से स्पष्ट होता है कि स्कूल के खिलाड़ी किसी भी स्तर पर चुनौतियों का डटकर सामना कर सकते हैं।इस अवसर पर कोच अनूप सांगवान, सुनील जाट, अनूज सांगवान,गौतम मंडोला और संदीप रीधाना के योगदान की विशेष रूप से सराहना की गई। स्कूल प्रबंधन ने खिलाड़ियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और विश्वास जताया कि आने वाले समय में ये खिलाड़ी न केवल स्कूल बल्कि गांव व जिले का भी नाम रोशन करेंगे।

मंगलवार, 29 जुलाई 2025

गांव खुडाना मोड़ पर ‘दिल्लीपति महाराजा अनंगपाल तोमर चौक’ का भव्य उद्घाटन, ऐतिहासिक विरासत को मिली नई पहचान 29एमजीएच001 भास्कर न्यूज। आकोदा गांव खुडाना के मुख्य मोड़ पर ऐतिहासिक महत्व रखने वाले दिल्लीपति महाराजा अनंगपाल तोमर के नाम पर बनाए गए ‘महाराजा अनंगपाल तोमर चौक’ का मंगलवार को भव्य उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर सैकड़ों लोगों ने भाग लिया और एक विशाल शोभा यात्रा निकाली गई। यह कार्यक्रम क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहर और तोमर वंश के महान शासक महाराजा अनंगपाल द्वितीय की याद में आयोजित किया गया, जिन्होंने दिल्ली की नींव रखी थी। दिल्ली के संस्थापक को समर्पित चौक गांव खुडाना के मुख्य मोड़, जो आकोदा से सतनाली और खुडाना से बास खुडाना जाने वाले मार्ग का प्रमुख जंक्शन है, को अब ‘दिल्लीपति महाराजा अनंगपाल तोमर चौक’ के नाम से जाना जाएगा। उद्घाटन समारोह में मुख्य रूप से युवा समाजसेवी हैप्पी तंवर खुडाना और स्थानीय गणमान्य लोगों ने भाग लिया। हैप्पी तंवर ने मीडिया से बातचीत में कहा, “महाराजा अनंगपाल तोमर हमारे पूर्वज थे। उन्होंने 11वीं शताब्दी में दिल्ली को बसाया और उसे ढिल्ली या ढिलीका नाम दिया। उनकी स्मृति में यह चौक स्थापित कर हम अपनी विरासत को सम्मान दे रहे हैं।” उन्होंने आगे बताया कि गांव खुडाना को ‘40सी’ कहा जाता है क्योंकि इस गांव से 40 अन्य गांवों की उत्पत्ति हुई है। इनमें खेडी तलवाना, निंबी, पाली, जाट, भुरजट, झगडोली, पाथेडा, चितलांग, भांडोर, कैमला, सिगड़ी राजपूत, पोता समेत उत्तर भारत और हरियाणा के कई गांव शामिल हैं। गांव खुडाना की स्थापना 1135 ईस्वी में इमरत सिंह ने की थी। भव्य शोभा यात्रा से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ चौक का उद्घाटन करने से पहले सुबह एक विशाल शोभा यात्रा निकाली गई, जिसमें सैकड़ों मोटरसाइकिल, ट्रैक्टर और चारपहिया वाहन शामिल हुए। युवा और बुजुर्गों ने मिलकर महाराजा अनंगपाल तोमर की जयघोष के साथ यात्रा को भव्य रूप दिया। शोभा यात्रा के बाद सुबह 10:15 बजे औपचारिक रूप से चौक का उद्घाटन किया गया। इस मौके पर दिनेश तंवर (बास खुडाना), बिजेंद्र खुडाना, डॉ. नरेश, मंजीत तंवर, देशराज पाली, हिमांशु आकोदा, मौजी पहलवान अशोक तंवर बास खुडाना, प्रमोद तंवर, महासिंह, मोटा पहलवान रोहित, अक्षय, आनंद, अजय समेत सैकड़ों युवा साथी और ग्रामीण मौजूद रहे। कौन थे महाराजा अनंगपाल तोमर? महाराजा अनंगपाल तोमर, जिन्हें अनंगपाल द्वितीय के नाम से भी जाना जाता है, 11वीं शताब्दी में दिल्ली के तोमर वंश के एक महान शासक थे। इतिहासकारों के अनुसार, वे तोमर वंश के 16वें और अंतिम शासक थे, जिनके बाद दिल्ली पर चौहानों ने शासन किया। अनंगपाल तोमर को दिल्ली के संस्थापक के रूप में जाना जाता है। उन्होंने दिल्ली शहर को बसाने का श्रेय अपने नाम किया। उस समय इस क्षेत्र को "ढिल्ली" या "ढिलीका" कहा जाता था। दिल्ली की ऐतिहासिक धरोहर में अनंगपाल का योगदान अनंगपाल तोमर का योगदान केवल दिल्ली बसाने तक सीमित नहीं था। उन्होंने कई ऐतिहासिक निर्माण कार्य करवाए, जिनमें शामिल हैं: • लालकोट किला: दिल्ली का सबसे पुराना किला, जिसे अनंगपाल तोमर ने बनवाया। • लौह स्तंभ की स्थापना: दिल्ली के महरौली में मौजूद लौह स्तंभ को वर्तमान स्थान पर स्थापित किया। यह स्तंभ मूल रूप से गुप्त सम्राट चंद्रगुप्त द्वितीय का था। • अनंग ताल और अनंगपुर बांध: दिल्ली और हरियाणा क्षेत्र में पानी की आपूर्ति और सिंचाई के लिए इनका निर्माण करवाया। दिल्ली के नामकरण से जुड़ी प्रसिद्ध कथा एक लोकप्रिय कथा के अनुसार, अनंगपाल तोमर ने जब दिल्ली में लौह स्तंभ स्थापित किया, तो एक ब्राह्मण ने उनसे कहा कि यह स्तंभ वासुकी नाग के सिर पर टिका हुआ है और जब तक यह सीधा खड़ा रहेगा, उनका शासन अटूट रहेगा। राजा ने सत्यता परखने के लिए स्तंभ को खोदने का आदेश दिया। जब स्तंभ निकाला गया तो वह खून से सना हुआ निकला। राजा ने स्तंभ को पुनः गाड़ने का आदेश दिया, लेकिन वह पहले जैसा सीधा नहीं रह पाया और ढीला रह गया। इसी कारण इस क्षेत्र का नाम ‘ढिल्ली’ पड़ा, जो समय के साथ ‘दिल्ली’ बन गया। ऐतिहासिक धरोहर को सम्मान देने का प्रयास कार्यक्रम के आयोजकों का कहना है कि महाराजा अनंगपाल तोमर जैसे महान शासकों की गाथा आज की पीढ़ी को बताना बेहद जरूरी है। हैप्पी तंवर ने कहा, “दिल्ली को बसाने वाले महाराजा अनंगपाल तोमर जैसे महापुरुषों का इतिहास नई पीढ़ी तक पहुंचे, इसी उद्देश्य से यह चौक स्थापित किया गया है। आने वाले समय में इस चौक को और भी आकर्षक रूप दिया जाएगा, ताकि लोग यहां आकर हमारे इतिहास को जान सकें।” स्थानीय ग्रामीणों का भी मानना है कि इस तरह के प्रयासों से समाज में अपनी जड़ों के प्रति गर्व और सम्मान की भावना जागृत होती है। बुजुर्ग ग्रामीणों ने इसे गांव और पूरे क्षेत्र के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया। भविष्य में सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण की योजना युवाओं ने कार्यक्रम के दौरान घोषणा की कि महाराजा अनंगपाल तोमर और तोमर वंश की ऐतिहासिक विरासत को सहेजने के लिए भविष्य में और भी कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साथ ही, इतिहास से जुड़ी स्मारक स्थलों के संरक्षण के लिए प्रशासन से सहयोग मांगा जाएगा। गांव खुडाना मोड़ पर ‘दिल्लीपति महाराजा अनंगपाल तोमर चौक’ का उद्घाटन केवल एक नामकरण नहीं है, बल्कि यह हमारी जड़ों से जुड़ने और अपने गौरवशाली इतिहास को याद करने का एक प्रयास है। महाराजा अनंगपाल तोमर की वीरता और दूरदर्शिता को सलाम करते हुए यह चौक आने वाली पीढ़ियों को उनकी महान गाथा याद दिलाता रहेगा।

 

महेंद्रगढ़

गांव खुडाना के मुख्य मोड़ पर ऐतिहासिक महत्व रखने वाले दिल्लीपति महाराजा अनंगपाल तोमर के नाम पर बनाए गए ‘महाराजा अनंगपाल तोमर चौक’ का मंगलवार को भव्य उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर सैकड़ों लोगों ने भाग लिया और एक विशाल शोभा यात्रा निकाली गई। यह कार्यक्रम क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहर और तोमर वंश के महान शासक महाराजा अनंगपाल द्वितीय की याद में आयोजित किया गया, जिन्होंने दिल्ली की नींव रखी थी।

दिल्ली के संस्थापक को समर्पित चौक

गांव खुडाना के मुख्य मोड़, जो आकोदा से सतनाली और खुडाना से बास खुडाना जाने वाले मार्ग का प्रमुख जंक्शन है, को अब ‘दिल्लीपति महाराजा अनंगपाल तोमर चौक’ के नाम से जाना जाएगा। उद्घाटन समारोह में मुख्य रूप से युवा समाजसेवी हैप्पी तंवर खुडाना और स्थानीय गणमान्य लोगों ने भाग लिया। हैप्पी तंवर ने मीडिया से बातचीत में कहा, “महाराजा अनंगपाल तोमर हमारे पूर्वज थे। उन्होंने 11वीं शताब्दी में दिल्ली को बसाया और उसे ढिल्ली या ढिलीका नाम दिया। उनकी स्मृति में यह चौक स्थापित कर हम अपनी विरासत को सम्मान दे रहे हैं।”उन्होंने आगे बताया कि गांव खुडाना को ‘40सी’ कहा जाता है क्योंकि इस गांव से 40 अन्य गांवों की उत्पत्ति हुई है। इनमें खेडी तलवाना, निंबी, पाली, जाट, भुरजट, झगडोली, पाथेडा, चितलांग, भांडोर, कैमला, सिगड़ी राजपूत, पोता समेत उत्तर भारत और हरियाणा के कई गांव शामिल हैं। गांव खुडाना की स्थापना 1135 ईस्वी में इमरत सिंह ने की थी।


भव्य शोभा यात्रा से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

चौक का उद्घाटन करने से पहले सुबह एक विशाल शोभा यात्रा निकाली गई, जिसमें सैकड़ों मोटरसाइकिल, ट्रैक्टर और चारपहिया वाहन शामिल हुए। युवा और बुजुर्गों ने मिलकर महाराजा अनंगपाल तोमर की जयघोष के साथ यात्रा को भव्य रूप दिया। शोभा यात्रा के बाद सुबह 10:15 बजे औपचारिक रूप से चौक का उद्घाटन किया गया। इस मौके पर प्रधान दिनेश तंवर (बास खुडाना), बिजेंद्र खुडाना, सरपंच प्रतिनिधि डॉ. नरेश सिंह, युवा नेता मंजीत तंवर, सरपंच देशराज पाली, हिमांशु आकोदा, मौजी पहलवान, अशोक तंवर बास खुडाना, प्रमोद तंवर, महासिंह, मोटा पहलवान रोहित, अक्षय, आनंद, अजय समेत सैकड़ों युवा साथी और ग्रामीण मौजूद रहे।

कौन थे महाराजा अनंगपाल तोमर?

महाराजा अनंगपाल तोमर, जिन्हें अनंगपाल द्वितीय के नाम से भी जाना जाता है, 11वीं शताब्दी में दिल्ली के तोमर वंश के एक महान शासक थे। इतिहासकारों के अनुसार, वे तोमर वंश के 16वें और अंतिम शासक थे, जिनके बाद दिल्ली पर चौहानों ने शासन किया।अनंगपाल तोमर को दिल्ली के संस्थापक के रूप में जाना जाता है। उन्होंने दिल्ली शहर को बसाने का श्रेय अपने नाम किया। उस समय इस क्षेत्र को "ढिल्ली" या "ढिलीका" कहा जाता था।

दिल्ली की ऐतिहासिक धरोहर में अनंगपाल का योगदान

अनंगपाल तोमर का योगदान केवल दिल्ली बसाने तक सीमित नहीं था। उन्होंने कई ऐतिहासिक निर्माण कार्य करवाए, जिनमें शामिल हैं:

लालकोट किला: दिल्ली का सबसे पुराना किला, जिसे अनंगपाल तोमर ने बनवाया।

लौह स्तंभ की स्थापना: दिल्ली के महरौली में मौजूद लौह स्तंभ को वर्तमान स्थान पर स्थापित किया। यह स्तंभ मूल रूप से गुप्त सम्राट चंद्रगुप्त द्वितीय का था।

अनंग ताल और अनंगपुर बांध: दिल्ली और हरियाणा क्षेत्र में पानी की आपूर्ति और सिंचाई के लिए इनका निर्माण करवाया।

दिल्ली के नामकरण से जुड़ी प्रसिद्ध कथा

एक लोकप्रिय कथा के अनुसार, अनंगपाल तोमर ने जब दिल्ली में लौह स्तंभ स्थापित किया, तो एक ब्राह्मण ने उनसे कहा कि यह स्तंभ वासुकी नाग के सिर पर टिका हुआ है और जब तक यह सीधा खड़ा रहेगा, उनका शासन अटूट रहेगा।

राजा ने सत्यता परखने के लिए स्तंभ को खोदने का आदेश दिया। जब स्तंभ निकाला गया तो वह खून से सना हुआ निकला। राजा ने स्तंभ को पुनः गाड़ने का आदेश दिया, लेकिन वह पहले जैसा सीधा नहीं रह पाया और ढीला रह गया। इसी कारण इस क्षेत्र का नाम ‘ढिल्ली’ पड़ा, जो समय के साथ ‘दिल्ली’ बन गया।

ऐतिहासिक धरोहर को सम्मान देने का प्रयास

कार्यक्रम के आयोजकों का कहना है कि महाराजा अनंगपाल तोमर जैसे महान शासकों की गाथा आज की पीढ़ी को बताना बेहद जरूरी है। हैप्पी तंवर ने कहा, “दिल्ली को बसाने वाले महाराजा अनंगपाल तोमर जैसे महापुरुषों का इतिहास नई पीढ़ी तक पहुंचे, इसी उद्देश्य से यह चौक स्थापित किया गया है। आने वाले समएय में इस चौक को और भी आकर्षक रूप दिया जाएगा, ताकि लोग यहां आकर हमारे इतिहास को जान सकें।”

स्थानीय ग्रामीणों का भी मानना है कि इस तरह के प्रयासों से समाज में अपनी जड़ों के प्रति गर्व और सम्मान की भावना जागृत होती है। बुजुर्ग ग्रामीणों ने इसे गांव और पूरे क्षेत्र के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया।

भविष्य में सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण की योजना

युवाओं ने कार्यक्रम के दौरान घोषणा की कि महाराजा अनंगपाल तोमर और तोमर वंश की ऐतिहासिक विरासत को सहेजने के लिए भविष्य में और भी कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साथ ही, इतिहास से जुड़ी स्मारक स्थलों के संरक्षण के लिए प्रशासन से सहयोग मांगा जाएगा।

 गांव खुडाना मोड़ पर ‘दिल्लीपति महाराजा अनंगपाल तोमर चौक’ का उद्घाटन केवल एक नामकरण नहीं है, बल्कि यह हमारी जड़ों से जुड़ने और अपने गौरवशाली इतिहास को याद करने का एक प्रयास है। महाराजा अनंगपाल तोमर की वीरता और दूरदर्शिता को सलाम करते हुए यह चौक आने वाली पीढ़ियों को उनकी महान गाथा याद दिलाता रहेगा।

मंगलवार, 22 जुलाई 2025

शिव मंदिर ढाणी आकोदा में विशाल भंडारा 24 जुलाई को

महेंद्रगढ़

हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी शिव रात्रि पर्व पर शिव मंदिर ढाणी आकोदा में 24 जुलाई 2025 वार बृहस्पतिवार को विशाल भंडारे का आयोजन किया जा रहा है।

अतः शिव मंदिर कमेटी व समस्त ग्राम वासी ढाणी व आकोदा आप सभी भक्त जनो व धर्मप्रेमियों से निवेदन करता है  कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में पहुंचकर बाबा भोलेनाथ का आशीर्वाद लेकर प्रसाद ग्रहण करे

 ‌‌

रविवार, 20 जुलाई 2025

शरारती तत्वों ने ब्लॉक समिति की जिला उपाध्यक्ष का साइन बोर्ड उखाड़ा, पुलिस में दी शिकायत

 

महेंद्रगढ़

महेंद्रगढ़ ब्लॉक समिति की जिला उपाध्यक्ष शिवानी तंवर का साइन बोर्ड अज्ञात शरारती तत्वों द्वारा उखाड़े जाने का मामला प्रकाश में आया है।

गांव आदलपुर निवासी रणधीर सिंह ने आकोदा पुलिस चौकी में दी शिकायत में बताया कि उनकी बेटी शिवानी तंवर महेंद्रगढ़ ब्लॉक समिति की जिला उपाध्यक्ष है। उनके निवास स्थान का एक साइन बोर्ड सरकार द्वारा मुख्य मार्ग पर लगाया गया था। यह साइन बोर्ड 18 जुलाई की रात्रि को कोई शरारती तत्व उखाड़ कर ले गया। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है।