गुरुवार, 7 मई 2026

आकोदा स्कूल में ‘कैच द रेन’ अभियान की धूम, विद्यार्थियों को दिलाई जल संरक्षण की शपथ


 

दुलीचंद राजकीय मॉडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल, आकोदा में ‘जल शक्ति अभियान: कैच द रेन’ के तहत 4 मई से 11 मई तक विभिन्न जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों और समुदाय को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करना है।

कार्यक्रम की प्रभारी उर्मिला यादव, प्रवक्ता (भूगोल) के नेतृत्व में 4 मई को सभी छात्र-छात्राओं व स्टाफ सदस्यों को जल संरक्षण एवं उसके उचित उपयोग की शपथ दिलाई गई। इस दौरान पानी बचाने और उसके दुरुपयोग को रोकने का संदेश दिया गया। 5 मई को जल संरक्षण विषय पर पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और अपने चित्रों के माध्यम से जल बचाने का संदेश दिया।

इसी कड़ी में बुधवार को एसएमसी (स्कूल मैनेजमेंट कमेटी) की बैठक आयोजित की गई, जिसमें उर्मिला यादव ने जल के महत्व पर विस्तार से चर्चा की और सभी से इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।

आगामी दिनों में अभियान के अंतर्गत सामुदायिक सहभागिता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। साथ ही प्रार्थना सभा में जल जनित रोगों एवं सुरक्षित पेयजल पर व्याख्यान भी दिए जाएंगे। इसके अतिरिक्त निबंध लेखन, वाद-विवाद, प्रश्नोत्तरी, स्लोगन लेखन और मॉडल निर्माण जैसी प्रतियोगिताएं भी कराई जाएंगी। कार्यक्रम के अंत में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत कर समापन किया जाएगा।

मंगलवार, 5 मई 2026

खुडाना की बाबा जयरामदास गौशाला में तूफान से भारी नुकसान, लाखों की संपत्ति क्षतिग्रस्त


 खुडाना स्थित बाबा जयरामदास गौशाला समिति में रविवार रात्रि करीब 9 बजे आए भयंकर तूफान और तेज बारिश ने भारी तबाही मचाई। अचानक आए इस प्राकृतिक आपदा ने गौशाला के ढांचे को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया, जिससे गौसेवा कार्य प्रभावित हो गया। गौशाला समिति के अनुसार इस हादसे में करीब 10 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।

जानकारी के अनुसार, तेज आंधी-तूफान के चलते गौशाला के दक्षिण दिशा की ओर बने टीन शेड (साइज 22×100) पूरी तरह उखड़कर बाहर जा गिरा। इसके अलावा गौशाला में बने चारा गोदामों की टीन की चादरें भी तेज हवाओं के कारण उड़ गईं, जिससे अंदर रखा सामान भी आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गया। तूफान की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कुछ ही मिनटों में गौशाला का बड़ा हिस्सा अस्त-व्यस्त हो गया।



गौशाला के प्रधान लीलू सिंह ने बताया कि तूफान के दौरान गौशाला में मौजूद पशुओं को सुरक्षित स्थान पर ले जाने के प्रयास किए गए, जिससे किसी भी पशु की जान का नुकसान नहीं हुआ। हालांकि, गौशाला के ढांचे और संसाधनों को भारी क्षति पहुंची है, जिसकी भरपाई करना समिति के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

उन्होंने बताया कि गौशाला पूरी तरह से दान और सहयोग पर निर्भर है, ऐसे में अचानक हुए इस बड़े नुकसान से संचालन पर संकट खड़ा हो गया है। समिति ने राज्य सरकार, संबंधित विभागों एवं हरियाणा गौ सेवा आयोग से आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग की है, ताकि गौशाला को दोबारा व्यवस्थित किया जा सके और गौसेवा कार्य सुचारु रूप से जारी रह सके।

स्थानीय ग्रामीणों ने भी इस घटना पर चिंता व्यक्त की है और प्रशासन से जल्द राहत प्रदान करने की अपील की है। ग्रामीणों का कहना है कि गौशाला क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सेवा केंद्र है, जहां बेसहारा एवं बीमार गायों की देखभाल की जाती है, इसलिए इसका जल्द पुनर्निर्माण आवश्यक है।