महेंद्रगढ़
क्रिकेट प्रतियोगिता के साथ-साथ बाबा जयरामदास आश्रम पाली अपनी आध्यात्मिक, प्राकृतिक और पर्यावरणीय विशेषताओं के कारण भी विशेष पहचान रखता है। मेले के दौरान जहां लाखों श्रद्धालु बाबा जयरामदास की समाधि पर नतमस्तक होकर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं, वहीं यह स्थल पक्षी और प्रकृति प्रेमियों के लिए भी श्रद्धा का केंद्र बन चुका है।
आश्रम के पूर्व दिशा में स्थित सैकड़ों वर्ष पुराना ब्राह्मण वाला जोहड़ और उसके चारों ओर लगे इन्दोख, जाल और पीपल के विशाल वृक्ष प्रकृति प्रेमियों के लिए शोध का विषय हैं। जोहड़ के किनारे स्थित प्राचीन इन्दोख के पेड़ दुर्लभ माने जाते हैं, जबकि जोहड़ के मध्य स्थित पीपल के वृक्ष के चारों ओर श्रद्धालु परिक्रमा कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं।
मंदिर परिसर के पीछे बना भव्य पक्षी घर इस धाम की अलग पहचान है। 73 फीट ऊंचा और 9 मंजिला यह पक्षी घर लगभग 3600 पक्षियों को घोंसले उपलब्ध कराता है। चारों ओर फैले सैकड़ों पेड़ और उन पर बने पक्षियों के घोंसले इस स्थान की सुंदरता को और भी बढ़ाते हैं। संयोजन कार्य से जुड़े कैलाश पाली बताते हैं कि पुराने मंदिर की दीवारों में मिट्टी के बर्तन लगाकर छोड़े जाते थे, जिनमें पक्षी घोंसले बनाते थे, जो हमारे पूर्वजों की पर्यावरणीय सोच को दर्शाता ह
वर्ष 2022 में विजय नलिनी नांगलिया, सज्जन शर्मा, रोहतास अग्रवाल, आनंद शर्मा और आचार्य कमलकांत के सहयोग से निर्मित यह पक्षी घर वर्ष भर पक्षियों की चहचहाहट से गूंजता रहता है। मेले के दौरान श्रद्धालु बाबा को नमन करने के साथ-साथ पक्षी घर के सामने रुककर प्रकृति संरक्षण का संदेश भी अपने साथ लेकर लौटते हैं। यह धाम न केवल आस्था, बल्कि प्रकृति और जीवन संरक्षण का भी सशक्त संदेश देता है।



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