प्रदेश सरकार द्वारा ऑनलाइन इंतकाल (म्यूटेशन) प्रक्रिया के लिए जारी नई गाइडलाइन को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में विरोध के स्वर उठने लगे हैं। किसानों के इंतकाल अंग्रेजी भाषा में दर्ज किए जाने की प्रस्तावित व्यवस्था पर चिंता व्यक्त करते हुए राष्ट्रीय जनलोक पार्टी (राजपा) के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह तंवर ने इसे ग्रामीण किसानों के हितों के विपरीत बताया है। उन्होंने कहा कि यदि किसानों से जुड़े महत्वपूर्ण राजस्व रिकॉर्ड केवल अंग्रेजी भाषा में तैयार किए जाएंगे तो बड़ी संख्या में ग्रामीणों को उन्हें समझने में कठिनाई होगी, जिससे अनावश्यक परेशानियां बढ़ सकती हैं।
गांव बसई में ग्रामीणों और किसानों से बातचीत करते हुए राकेश सिंह तंवर ने कहा कि सरकार डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने और राजस्व कार्यों को ऑनलाइन करने की दिशा में सराहनीय प्रयास कर रही है, लेकिन किसी भी नई व्यवस्था को लागू करते समय आमजन की सुविधा और समझ का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी अधिकांश किसान हिंदी भाषा का ही प्रयोग करते हैं तथा बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जिन्हें अंग्रेजी का सीमित या बिल्कुल भी ज्ञान नहीं है।
किसानों को रिकॉर्ड समझने में आएगी परेशानी
राकेश सिंह तंवर ने कहा कि भूमि संबंधी दस्तावेज, इंतकाल और अन्य राजस्व रिकॉर्ड किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर ही भूमि स्वामित्व, बैंक ऋण, सरकारी योजनाओं का लाभ और अन्य प्रशासनिक कार्य पूरे किए जाते हैं। यदि ये रिकॉर्ड अंग्रेजी में होंगे तो किसानों को बार-बार दूसरों पर निर्भर रहना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक बुजुर्ग किसान ऐसे हैं जो केवल हिंदी पढ़ और समझ सकते हैं। ऐसे लोगों के लिए अंग्रेजी में दर्ज रिकॉर्ड को समझना बेहद कठिन होगा। इससे गलतफहमियों और विवादों की संभावना भी बढ़ सकती है।
नंबरदार और ग्रामीण प्रतिनिधियों को भी होगी दिक्कत
राजपा प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि गांवों में रजिस्ट्री और राजस्व संबंधी कार्यों में नंबरदारों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अधिकांश नंबरदार किसानों और प्रशासन के बीच समन्वय का कार्य करते हैं, लेकिन उनमें से भी कई लोगों का अंग्रेजी ज्ञान सीमित है। ऐसे में यदि इंतकाल अंग्रेजी में दर्ज किए जाएंगे तो उन्हें भी दस्तावेजों को समझने और किसानों को सही जानकारी देने में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जो तकनीकी रूप से आधुनिक होने के साथ-साथ आम नागरिक के लिए भी सरल और सुलभ हो।
हिंदी को बढ़ावा देने की नीति से भी उठे सवाल
राकेश सिंह तंवर ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें समय-समय पर हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए अनेक कार्यक्रम आयोजित करती हैं। सरकारी कार्यालयों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने की बात कही जाती है तथा हिंदी पखवाड़े और अन्य जागरूकता अभियान भी चलाए जाते हैं। ऐसे में किसानों से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों को अंग्रेजी में तैयार करने का निर्णय विरोधाभासी प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में हिंदी को बढ़ावा देना चाहती है तो राजस्व विभाग के दस्तावेजों में भी हिंदी को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इससे न केवल किसानों को सुविधा मिलेगी बल्कि प्रशासन और आमजन के बीच संवाद भी अधिक प्रभावी होगा।
हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध हो दस्तावेज
राजपा प्रदेशाध्यक्ष ने सुझाव देते हुए कहा कि सरकार यदि तकनीकी कारणों से अंग्रेजी का प्रयोग करना चाहती है तो उसके साथ-साथ हिंदी में भी रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जानी चाहिए। इससे किसानों को अपने दस्तावेजों को समझने में आसानी होगी और उन्हें किसी अन्य व्यक्ति पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि भूमि से संबंधित मामलों में पारदर्शिता और स्पष्टता बेहद आवश्यक है। दस्तावेज ऐसी भाषा में होने चाहिए जिन्हें संबंधित व्यक्ति आसानी से पढ़ और समझ सके।
मुख्यमंत्री के नाम सौंपा जाएगा ज्ञापन
राकेश सिंह तंवर ने बताया कि किसानों की इस समस्या को लेकर जल्द ही उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। ज्ञापन में मांग की जाएगी कि ऑनलाइन इंतकाल प्रक्रिया में हिंदी भाषा को भी शामिल किया जाए तथा किसानों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए नई गाइडलाइन में आवश्यक संशोधन किए जाएं। उन्होंने कहा कि किसानों की सुविधा और अधिकारों से जुड़े किसी भी मुद्दे पर राजपा उनके साथ खड़ी है और सरकार तक उनकी आवाज पहुंचाने का कार्य करती रहेगी। ग्रामीणों ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए कहा कि राजस्व रिकॉर्ड उनकी समझ की भाषा में उपलब्ध होने चाहिए, ताकि वे अपने अधिकारों और भूमि संबंधी विवरणों को आसानी से समझ सकें।

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