कृषि प्रवेक्षक रविंदर ने बताया कि फार्मर आईडी किसानों की पहचान और कृषि संबंधी रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से व्यवस्थित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके माध्यम से किसान की कृषि भूमि, फसल और अन्य संबंधित जानकारी को सरकारी रिकॉर्ड से जोड़ा जा सकेगा। भविष्य में विभिन्न कृषि योजनाओं एवं सुविधाओं का लाभ लेने के लिए यह आईडी उपयोगी होगी।
उन्होंने बताया कि फार्मर आईडी नहीं होने की स्थिति में किसानों को फसल मंडी में बेचने, सरकारी सब्सिडी प्राप्त करने, खाद एवं बीज की सुविधाएं लेने तथा फसल खराब होने पर मिलने वाले मुआवजे सहित अन्य योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी हो सकती है। इसलिए किसानों से समय रहते आईडी बनवाने का आग्रह किया गया है।
वहीं, जिन किसानों की फार्मर आईडी पहले से बन चुकी है, उनकी आईडी का सत्यापन भी लगभग पूरा किया जा चुका है। ऐसे किसान अपनी आईडी की स्थिति की जांच कर लें और किसी प्रकार की त्रुटि होने पर समय रहते उसका समाधान कराएं। किसानों से अपील की गई है कि वे अंतिम दिनों का इंतजार न करें और आज ही फार्मर आईडी बनवाकर संभावित परेशानी से बचें।

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