शुक्रवार, 6 मार्च 2026

गांव गढ़ी में होली का अपना ही रंग और परंपरा है।


गांव गढ़ी में ढप्प (Dhapp) बजाकर धमाल गाने की पुरानी परंपरा रही है। प्रतीकात्मक रूप से ढप्प बजाकर धमाल गाया गया और सभी को रंग-गुलाल लगाकर खुशियां मनाई गईं।

गांव के आंगन में पानी की मस्ती के साथ भाभियों के साथ होली खेलने का अलग ही आनंद, भाइयों का भाईचारा, पूरे गांव में मिलना-जुलना - यही तो होली के त्योहार का असली संगम है।

फिर सबको मिठाई खिलाना, बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना और छोटों को प्यार देना, यही गांव की खूबसूरत परंपरा है।

यहां वर्षों से ढप्प बजाकर धमाल गाने की परंपरा रही है। हमारे बुजुर्ग मंदिर के नीचे वाले आंगन से शुरू होकर घर-घर जाकर प्यार और भाईचारा बांटते थे।

उसी परंपरा को निभाते हुए इस होली पर भी रंग-गुलाल और पानी वाली मस्ती भरी होली, भाभियों के साथ हंसी-मजाक और पूरे गांव में मिलना-जुलना - यह सब मिलकर होली को और भी खास बना देता है।

बड़े-बुजुर्गों, चाचा-ताऊ-ताई का आशीर्वाद, छोटों का स्नेह और हर घर में मिलने वाला निस्वार्थ, निश्छल और आत्मीय प्रेम यही इस गांव की असली पहचान है।

सच में गांव गढ़ी की होली का प्यार, अपनापन और वो पल अद्भुत होते हैं।


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