“मेरा कसूर बस इतना है कि मैंने हर मंच, हर माध्यम का इस्तेमाल सिर्फ और सिर्फ अपने जिले की आवाज़ सरकार तक पहुँचाने के लिए किया।” यह कहना है हरियाणा सरकार के पूर्व मंत्री डॉ. अभय सिंह यादव का। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि अपने जिले के विकास की बात करना अपराध है, तो वे यह अपराध बार-बार करते रहेंगे।
डॉ. अभय सिंह यादव ने कहा कि उनका उद्देश्य कभी व्यक्तिगत राजनीति या पद की लालसा नहीं रहा, बल्कि उनका संघर्ष हमेशा इस बात के लिए रहा कि हरियाणा के पिछड़े जिलों में गिने जाने वाले उनके जिले को भी विकास और आधुनिकता की दौड़ में आगे लाया जाए। उन्होंने कहा कि वर्षों तक यह जिला उपेक्षा का शिकार रहा, न पर्याप्त संसाधन मिले, न ही योजनाओं का सही लाभ। ऐसे में यदि उन्होंने सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए आवाज उठाई, सवाल किए और दबाव बनाया, तो इसमें गलत क्या है।
पूर्व मंत्री ने कहा कि उनका सपना है कि जिले के हर चेहरे पर मुस्कान हो। किसान के खेत में हरियाली हो, युवा को रोजगार मिले, बच्चे को बेहतर शिक्षा और बीमार को समय पर इलाज मिले। “जब किसान खुश होगा, युवा आत्मनिर्भर होगा और आम आदमी सम्मान से जी पाएगा, तभी विकास का अर्थ पूरा होगा,” उन्होंने कहा।
डॉ. यादव ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने हमेशा सकारात्मक राजनीति की है। विकास कार्यों के लिए सरकार के सामने तथ्यों और ज़मीनी सच्चाइयों को रखा। कई बार इसके लिए उन्हें आलोचना का सामना भी करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी अपने कदम पीछे नहीं खींचे। उनका कहना है कि जनप्रतिनिधि का धर्म ही जनता की आवाज़ बनना है, न कि चुप रहकर तमाशा देखना।
उन्होंने आगे कहा कि आज यदि जिले में सड़कों, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे को लेकर चर्चा हो रही है, योजनाएं जमीन पर उतर रही हैं, तो यह लगातार उठाई गई आवाज़ों का ही परिणाम है। “मैं चाहता हूँ कि मेरा जिला सिर्फ नक्शे में नहीं, विकास के आंकड़ों में भी आगे दिखे,” डॉ. यादव ने दो टूक कहा।
अंत में उन्होंने कहा कि राजनीति उनके लिए साधन है, साध्य नहीं। जब तक जिले के आखिरी व्यक्ति तक विकास की रोशनी नहीं पहुँचती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। “अगर इसी को मेरा कसूर कहा जा रहा है, तो मुझे अपने इस कसूर पर गर्व है,” कहते हुए उन्होंने अपनी बात समाप्त

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