शुक्रवार, 9 जनवरी 2026

पाली स्थित बाबा जयरामदास आश्रम पर्यावरण संरक्षण का जीवंत उदाहरण पानी बचाओ, पेड़ लगाओ, पॉलिथीन भगाओ, पक्षी बढ़ाओ के संदेश को साकार करता आश्रम, 14 जनवरी को लगेगा विशाल मेला

 

महेंद्रगढ़

“पानी बचाओ, पेड़ लगाओ, पॉलिथीन भगाओ, पक्षी बढ़ाओ” जैसे प्रेरणादायक नारे की वास्तविक सार्थकता यदि कहीं देखने को मिलती है तो वह है पाली का बाबा जयरामदास आश्रम। ब्राह्मण वाला जोहड़ की पाल पर स्थित यह प्राचीन आश्रम न केवल श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, बल्कि पर्यावरण प्रेमियों के लिए भी एक आदर्श स्थल बन चुका है। यहां आस्था, प्रकृति और आधुनिक सोच का अनूठा संगम देखने को मिलता है।

आश्रम के समीप स्थित जोहड़ के किनारे सैकड़ों वर्ष पुराने इन्दोख और पीपल के विशाल वृक्ष आज भी पक्षियों के सुरक्षित आश्रय स्थल बने हुए हैं। पुराने समय से ही यह क्षेत्र पक्षियों की चहचहाहट से गूंजता रहा है। वर्तमान में इसी जोहड़ के तट पर निर्मित भव्य एवं दिव्य पक्षी घर हजारों पक्षियों को आश्रय प्रदान कर रहा है। करीब 73 फुट ऊंचा यह पक्षी घर न केवल श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र है, बल्कि युवा पीढ़ी को पक्षियों और प्रकृति के प्रति जागरूक करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

एक ओर जहां जोहड़, पुराने वृक्ष और प्राकृतिक वातावरण आश्रम को अनुपम सौंदर्य प्रदान करते हैं, वहीं दूसरी ओर आधुनिक तकनीक का उपयोग कर बनाया गया पक्षी घर इसकी सुंदरता में चार चांद लगा देता है। जोहड़ में अनेक प्रकार के जल जीव निवास करते हैं और आश्चर्य की बात यह है कि वर्षों से इसका पानी कभी सूखा नहीं है। कच्ची सतह होने के कारण वर्षा का जल इसमें सहज रूप से एकत्र होता है, जिससे भूमिगत जलस्तर को ऊपर उठाने में भी बड़ी सहायता मिलती है। सर्दी के मौसम में दूर-दराज से आने वाले प्रवासी पक्षी भी इस जोहड़ को अपना अस्थायी बसेरा बनाते हैं।

बाबा जयरामदास मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले अनाज का भी सदुपयोग किया जाता है। मंदिर कमेटी द्वारा प्रतिदिन लगभग एक क्विंटल अनाज पक्षियों के लिए डाला जाता है, जिससे हजारों पक्षियों का पालन-पोषण होता है। पुराने समय से यहां जाल के वृक्षों की बणी रही है और आज भी अनेक जाल के पेड़ यहां पाए जाते हैं, जो वर्तमान समय में दुर्लभ होते जा रहे हैं।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में पर्यावरण संरक्षण समिति द्वारा कैलाश पाली के नेतृत्व में उल्लेखनीय कार्य किया गया है। समिति ने सैकड़ों नीम और बड़ के पौधे लगाकर पूरे क्षेत्र को हरा-भरा बनाने में अहम योगदान दिया है। वहीं आश्रम में लगने वाले भंडारों में वर्ष 2015 के बाद थाली और गिलास का प्रयोग शुरू किया गया, जिसके चलते थर्मोकोल और पॉलिथीन का उपयोग लगभग समाप्त कर दिया गया है। यह कदम पर्यावरण संरक्षण का सशक्त संदेश देता है।

प्रति वर्ष माघ बदी एकादशी को बाबा जयरामदास की समाधि पर विशाल मेले का आयोजन होता है। इस मेले में लाखों श्रद्धालु बाबा की समाधि पर माथा टेकने के लिए पहुंचते हैं। मेले के अवसर पर ग्रामवासियों द्वारा कबड्डी, कुश्ती, वॉलीबॉल, दौड़ और क्रिकेट जैसी अनेक खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाता है, जिनमें दूर-दूर से खिलाड़ी भाग लेने आते हैं। इस वर्ष बाबा जयरामदास का यह विशाल मेला 14 जनवरी को आयोजित होगा, जिसकी तैयारियां जोरों पर हैं।

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