गुरुवार, 5 फ़रवरी 2026

ऑनलाइन रिकॉर्ड की गलती से आकोदा–खरकड़ा के किसान परेशान, रजिस्ट्री तक में बदल गया गांव की पंचायत का नाम 5 साल से जारी है समस्या, 9 जनवरी को भी भास्कर ने उठाया था मामला, अब मुख्यमंत्री तक जाने की तैयारी

 

महेंद्रगढ़ खंड के गांव आकोदा–खरकड़ा के किसानों और ग्रामीणों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। ऑनलाइन सरकारी पोर्टलों में गांव की गलत पहचान के चलते सरकारी योजनाओं से लेकर जमीन की रजिस्ट्री तक प्रभावित हो रही है। ताजा मामला 29 जनवरी 2026 का है, जब गांव आकोदा निवासी पूर्व सैनिक राजेंद्र यादव की जमीन की रजिस्ट्री में गांव आकोदा–खरकड़ा की जगह पंचायत का गांव खरकड़ा बास दर्ज कर दिया गया।

पूर्व सैनिक राजेंद्र यादव ने बताया कि उन्होंने विधिवत प्रक्रिया पूरी कर रजिस्ट्री करवाई थी, लेकिन दस्तावेज देखने पर गांव की पंचायत का नाम बदला हुआ पाया। उन्होंने इसे विभागीय लापरवाही करार देते हुए कहा कि सरकार छोटे-छोटे तकनीकी कारणों से आम आदमी के फार्म खारिज कर देती है। यदि किसी के नाम में स्पेस हो या देवी-बाई जैसे शब्द हों तो आवेदन स्वीकार नहीं होता, लेकिन जब खुद सरकार रजिस्ट्री में गांव का नाम बदल दे, तो यह सरासर अन्याय है।

ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई नया मामला नहीं है। गांव आकोदा–खरकड़ा प्रशासनिक रूप से महेंद्रगढ़ खंड में आता है, लेकिन विभिन्न ऑनलाइन पोर्टलों पर इसे कनीना खंड में दिखाया जा रहा है। इसी वजह से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना, फार्मर आईडी, किसान आईडी और पेपरलेस रजिस्ट्री जैसे कार्यों में बार-बार आवेदन रद्द हो रहे हैं।

गांव के पूर्व सरपंच जितेंद्र ने बताया कि इस समस्या को लेकर आज खुले दरबार में जिला उपायुक्त से मुलाकात की जाएगी। यदि वहां भी समाधान नहीं होता है, तो गांव का एक प्रतिनिधिमंडल इस गंभीर मुद्दे को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मिलेगा। उन्होंने कहा कि पांच साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन प्रशासन की ओर से आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

जब इस मामले में गिरदावर सुबे सिंह से बातचीत की गई, तो उन्होंने इसे डीईओ कार्यालय नारनौल से संबंधित बताया। वहीं डीईओ नारनौल ने इसे रेवेन्यू डिपार्टमेंट का मामला बताते हुए कहा कि उन्हें जो रिकॉर्ड उपलब्ध कराया गया, उसी के आधार पर पोर्टल अपडेट किया गया है। उन्होंने ग्रामीणों को डीआरओ से मिलने या हेड ऑफिस चंडीगढ़ में मेल अथवा पत्र लिखने की सलाह दी। विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आ रहे हैं, जबकि समस्या जस की तस बनी हुई है।

गौरतलब है कि दैनिक भास्कर ने 9 जनवरी को भी इस समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। उस समय भी किसानों ने गुहार लगाई थी कि गांव की गलत पहचान के कारण उनके आवेदन ऑनलाइन पोर्टलों पर स्वीकार नहीं हो रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया था कि वर्ष 2020 में ही इस त्रुटि को लेकर अधिकारियों को अवगत करवा दिया गया था, लेकिन पांच साल बीतने के बाद भी समाधान नहीं हो सका।

अब सरकार की ओर से किसान आईडी बनाने का कार्य तेजी से चल रहा है। ऐसे में यदि गांव का नाम और खंड सही नहीं किया गया, तो बड़ी संख्या में किसान सरकारी योजनाओं से वंचित रह जाएंगे। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और सरकार से मांग की है कि गांव आकोदा–खरकड़ा को सही रूप में महेंद्रगढ़ खंड के अंतर्गत ऑनलाइन रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए, ताकि किसानों और ग्रामीणों को लंबे समय से चली आ रही इस परेशानी से राहत मिल सके।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें